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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में वेबिनार आयोजित

अलीगढ़ 24 जूनः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमें पतंजलि के योगदर्शन, श्री अरबिंदो के इंटीग्रल योग, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और सूफीवाद पर व्याख्यान दिए गए।

कार्यक्रम में दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पांडिचेरी, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के अन्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के कई शिक्षकों, शोध छात्रों और अन्य छात्रों ने भाग लिया।

अपने उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि कला संकाय के डीन प्रोफेसर आरिफ नजीर ने संत कबीरदास और स्वामी गोरखनाथ की रचनाओं पर प्रकाश डाला और योग की खूबियों के बारे में बताया।

प्रो. सुधीर कुमार आर्य, संस्कृत एवं भारतीय अध्ययन विभाग, जे.एन.यू., नई दिल्ली ने पतंजलि के योगदर्शन का सार प्रस्तुत किया और आधुनिक समय में इसकी प्रासंगिकता के बारे में बताया।

एएमयू के अरबी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सनाउल्लाह नदवी ने दाराशिकोह, अल-बिरूनी और अन्य सूफी संतों के कार्यों पर चर्चा की और योगदर्शन में पाए जाने वाले सूफीवाद की समानताओं को इंगित किया।

प्रोफेसर पूनम जैन, डी.एस. कॉलेज, अलीगढ़ ने शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए जैन धर्म के ग्रंथों में बताए गए विभिन्न प्रकार के ध्यान और अन्य अभ्यासों के गुणों पर चर्चा की।

दिल्ली विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग के डॉ. मोहन मिश्रा ने बौद्ध धर्म में योग की विभिन्न अवधारणाओं और उनकी सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर ध्यान केंद्रित किया।

इससे पूर्व संस्कृत विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर हिमांशु शेखर आचार्य ने वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत किया और कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य को सुनिश्चित करता है। वर्तमान अराजक वैश्विक माहौल के बीच योग आशा की किरण है। यह व्यक्तियों के भीतर शांति सुनिश्चित करता है जिससे अंततः समाज में शांति आती है।

सुश्री खुशबू ने संस्कृत में कार्यक्रम का संचालन किया और शोध छात्रा सुश्री विशाखा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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