Total Views: 290

वाराणसीः राजीव गाँधी दक्षिणी परिसर स्थित पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, मिर्ज़ापुर में “पशुधन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एंटीबायोटिक प्रतिरोध को नियंत्रित करने के मानक तरीके” विषय पर किसानों हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन 29 जनवरी 2024 को किया गया। कार्यशाला की शुरुआत प्रो. एन.के. सिंह, डॉ. राकेश निगम, प्रो. अमित राज गुप्ता, डॉ. संजय रवि, डॉ. अमितोष सक्सेना एवं डॉ. रजत वार्ष्णेय द्वारा भारत रत्न महामना पं. मदन मोहन मालवीयजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर के की गयी।

डॉ. जयंत गोयल एवं डॉ. अर्चना ने सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया तथा एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर अपने विचार व्यक्त किये।

डॉ. अजीत सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि पशुओं को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए उचित प्रतिवादी उपायों का अनुसरण करें जिसमे टीकाकरण, स्वच्छता एवं अच्छी आहार पर जोर दिया। डॉ.सौरभ करुणामय ने दुग्ध एवं मांस के सचेत उपभोग के माध्यम से एंटीबायोटिक प्रतिरोध के संचरण को कम करन पर प्रकाश डाला।
डॉ. रजत वार्ष्णेय ने एंटीबायोटिक प्रतिरोधी को नियंत्रित करने की रणनीतियों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अनुभवजन्य चिकित्सा
, निर्देशित चिकित्सा, संयोजन चिकित्सा का उपयोग, रोग निदान के लिए नमूना एकत्र करने के सही तरीके, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने और अप्रयुक्त दवाओं का उचित निस्तारण आदि बिन्दुओ पर प्रकाश डाला। डॉ महिपाल चौबे ने पशु आहार में एंटीबायोटिक दवाओं के विकल्प के रूप में खाद्य योजक के बारे में चर्चा की।  किसानों ने पशु फार्म और माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।  यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (21779) प्रोजेक्ट के सहयोग से आयोजित किया गया था।  अंत में डॉ. रजत वार्ष्णेय (संगठन सचिव), सह-संगठन सचिव (डॉ. मयूख घोष, डॉ. के.डी. मंडल, डॉ. साजिदा बानो) और डॉ. अनुपम ने किसानों को प्रमाणपत्र वितरित किया। कार्यक्रम में डॉ. संदीप चौधरी, डॉ. श्रवण, डॉ. धनंजय, डॉ. अभिषेक (छात्र सलाहकार), डॉ. पवन कुमार यादव, डॉ. सुवनीत भी उपस्थित रहे।

Leave A Comment