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वाराणसीः वित्तीय पूँजी की अंतिम विजय के दावों और रोजगार विहीन विकास की हकीकत के बीच आज उच्च कोटि के प्रातः स्मरणीय सरयूपारीय ब्राह्मण विमल कुमार मिश्र ने अपने थानेदार होने का रौब गालिब करते हुए एक 23 वर्षीय युवक को बेरोजगार कर दिया।
कहाँ हैं सामाजिक न्याय के झंडाबरदार क्योंकि जो युवक थानेदार विमल कुमार मिश्रा की मनबढ़ई के चलते बेरोजगार हुआ है वह डोम जाति से ताल्लुक रखता है। कहने-बताने की जरूरत नहीं कि डोम अछूतों में भी अछूत माने जाते हैं।
वाराणसी पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार थाना चौक पुलिस टीम द्वारा मुखबिर की सूचना पर कल अभियुक्त विनोद डोम पुत्र शंकर डोम निवासी राजघाट डोमखाना थाना-आदमपुर वाराणसी उम्र करीब 23 वर्ष को एक देशी तमंचे 0.315 बोर व एक जिन्दा कारतूस 0.315 बोर  के साथ गंगा महल घाट के पास से गिरफ्तार किया गया। मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। पकड़े गये व्यक्ति से पूछताछ करने पर जो दुःखभरी कहानी सामने आई है, वह कुछ इस प्रकार से हैः मेरा नाम विनोद डोम है और मैं घाटों पर घूमता-फिरता रहता हूँ, जब कोई पैसे वाला व्यक्ति मुझे दिखाई देता है तो मैं उसे अकेला पाकर उसको तमन्चे का डर दिखा कर उसको लूट लेता हूँ और जो पैसा मिलता है मैं उससे अपना परिवार चलाता हूँ।
बनारस में सामाजिक न्याय के सबसे बड़े पुरोधा रामजी यादव कहते हैंः योगी आदित्य नाथ की पुलिस ने डोम जाति के युवक को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन अब उसके परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा, क्या इसकी भी कोई फिक्र कर रहा है। बेचारा तमंचा दिखाकर लूटता ही तो था, किसी की जान तो नहीं लेता था। इस हिसाब से तो फिर जितनी भी बीमा कंपनियाँ है, उन सभी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि वे भी तो भय दिखाकर पब्लिक को लूटती ही हैं। भय का कारोबार मामूली नहीं है, दिग-दिगंत तक फैला हुआ है।
चंदे पर पलने को अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझने वाले मनीष शर्मा का कहना है कि छोटे-मोटे अपराध अगर न हों तो जिंदगी से रोमांच ही गायब हो जाएगा।
अपराध और बेरोजगारी के रिश्ते पर प्रकाश डालते हुए डॉ. मोहम्मद आरिफ कहते हैं कि बेरोजगारी को शत-प्रतिशत दूर कर दीजिए, अपराध की दर नाममात्र की रह जाएगी। एक तरफ उदरपूर्ति करने लायक कमाई भी नहीं होती, दूसरी तरफ ऐश्वर्य के टापू खड़े नजर आते हैं। अभाव-प्रचुरता दोनों का ही सामना कर रहे समाज आत्मिक रिक्तता की मार झेल रहे हैं और दोनों ही जगहों पर घातक-मारक नशों का जाल फैला हुआ है।
डॉ. आनंद प्रकाश तिवारी कहते हैंः बेरोजगार युवक नशेड़ी और नशे के कारोबारी दोनों ही बने हुए हैं। पुलिस बीच-बीच में नशे की छोटी-बड़ी खेप पकड़कर अपनी पीठ थपथपाती रहती है। डॉ. तिवारी ने कहा कि उनकी पूरी हमदर्दी उस डोम युवक के साथ है, जो चौक पुलिस की कार्रवाई के चलते बेरोजगार हुआ है। पुलिस कमिश्नर को चाहिए कि उसके परिवार की आजीविका को चलाने के लिए हर संभव सरकारी मदद दिलवाएं।
वरिष्ठ पत्रकार एके लारी कहते हैंः बनारस पुलिस की ओर से जारी किए जाने वाले प्रेस नोट्स पर अगर करीब से नजर डाली जाए तो दारू-गाँजा, स्त्री के विरुद्ध अपराध, वाहन-चोरी और दूसरे मामूली अपराध, भूमि-विवाद और शांति-व्यवस्था को बनाए रखने संबंधी मामले अक्सर सामने आते हैं। यह पैटर्न तब तक बना रहेगा, जब तक बेरोजगारी विकराल रूप धारण किए रहेगी।
ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि जो आज के युग की सबसे बड़ी समस्या है, अर्थात बेरोजगारी की समस्या, उसमें इजाफा करने वाले थानेदार विमल कुमार मिश्र से क्या पुलिस कमिश्नर को सफाई नहीं माँगनी चाहिए?

 

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