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वाराणसीः काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित पशु चिकित्सा विज्ञान संकाय, राजीव गाँधी दक्षिणी परिसर, में २७ अप्रैल २०२४ को विश्व पशु चिकित्सा दिवस का सफल आयोजन किया गया। इसके तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसका मुख्य शीर्षक Veterinarians are Essential Health Workers था।

इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर क्लीनिकल केस प्रतियोगिता, पोस्टर प्रस्तुतीकरण, रंगोली प्रतियोगिता एवं पशुओं के मुफ़्त टीकाकरण शिविर का आयोजन किया गया। पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डॉ. राजेश कुमार चौरसिया ने पशुओं की पीड़ा को काम करने के तरीकों पर जोर देते हुए नए पशु चिकित्सकों से अधिक सहभागिता की अपेक्षा जाहिर की।

डॉ. राजेश कुमार, विशिष्ट अतिथि तथा मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, मिर्जापुर, ने पशु चिकित्सकों की ग्रामीण स्तर पर जिम्मेदारी का निर्वहन हुए पशुओं की सेवाभाव सुनिश्चित करने का आग्रह किया। संकाय प्रमुख डॉ. शाहिद परवेज ने सहभागियों एवं छात्रों को आशीर्वाद देकर उनके बेहतर भविष्य की कामना की। डॉ. अमित राज गुप्ता ने विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिभागियों के उत्साहवर्धक सम्मिलित होने पर खुशी जाहिर की।

क्लीनिकल केस में कुल १२७ प्रतिभागियों ने बाद चढ़ कर हिस्सा लिया। कुमार रवि ने सभी प्रतिभागियों, छात्रों एवं संकाय सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन के अंतर्गत योजना, पशु चिकित्सा विज्ञान संकाय, के अंतर्गत सफाई अभियान का आयोजन डॉ सौरभ करुणामई के देख रेख में समपन्न हुआ। डॉ. प्रिय रंजन, डॉ. दयानिधि जेना, डॉ. बलमुरगण, डॉ. सुवनीथ, डॉ. विनीत, डॉ. कृति मंडल, डॉ. सौरभ जिंगरे, डॉ. विनोद एवं अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

डॉ. कृति मंडल के अनुसार

पशु चिकित्सक मानव और पशु स्वास्थ्य के बीच के जटिल जाल के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। उनका विशेषज्ञता पालतू जानवरों की देखभाल, निगरानी की जागरूकता और जूनोटिक रोगों के खिलाफ सक्रिय हस्तक्षेप तक ब्याप्त है. जूनोटिक रोग ऐसे बीमारी होता हे जो पशु और मानव दोनों के लिए जोखिम पैदा करते हैं। ये बीमारी पशुओं से इंसानो को फैलती हैं| अपनी अटल समर्पण और अन्य बिभागों के साथ सहयोग के माध्यम से, पशु चिकित्सक जूनोटिक ब्रेकआउट्स की शुरू से ही पहचान, नियंत्रण और रोकथाम में योगदान करते हैं, जैसे कि रेबीज़, ब्रूसेलोसिस, और फाउल इन्फ्लुएंजा, मंकी पॉक्स, स्वाइन फ्लू जैसे खतरे के खिलाफ मानब समुदायों की सुरक्षा करते हैं।

इसके अलावा, पशु चिकित्सक वन हेल्थ उपाय का प्रचार करते हैं, मानव, पशु, और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के जोड़ का समर्थन करते हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ साजिदारी का निर्माण करके और प्रमाण-आधारित नीतियों के प्रचार करके, पशु चिकित्सक मानव-पशु-पर्यावरण के अनुबंध पर स्वास्थ्य जोखिमों की व्यापक समझ को बढ़ावा देते हैं। उनके बहुपक्षीय भूमिकाएँ क्लिनिकल देखभाल के साथ ही शोध, शिक्षा, और सार्वजनिक संचार पहलों को संजोने में आती हैं, जो प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा को सुधारने में मदद करती हैं। संक्षेप में, पशु चिकित्सक स्वस्थ पशु एबं मानब की रक्ष्यक हैं।”

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