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हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग,इलाहाबाद विश्वविद्यालय का आयोजन

प्रयागराजः हिंदी साहित्य के इतिहास में यदि भक्ति काल स्वर्ण युग है तो उसका मजबूत स्तंभ है- संत साहित्य। संत साहित्य में ‘मानवता’ ही वह मूल्य है जिसके माध्यम से यह साहित्य, विश्व साहित्य की कोटि में आता है। सामाजिक समरसता और सहिष्णुता उसका केंद्रीय भाव है। अब्दुर्रहीम खानखाना का संपूर्ण रचना कर्म इस बात की ताकीद करता है।तुलसीदास उनके समकालीन और मित्र थे। रहीम के काव्य में विषय वैविध्यपूर्ण है। श्रृंगार रस की रचना ‘मदनाष्टक’ है, तो ‘नगर शोभा’ आमजन की संवेदनाओं की रचना है।जिसमें समाज के हर तबकेका दुख दर्द समाहित है। बरवै नायिका भेद आचार्य परंपरा की रचना है। रहीम दोहावली भक्ति,नीति और श्रृंगार का अनुपम ग्रंथ है। वे संस्कृत, फारसी, तुर्की,ब्रज और अवधी भाषाओं के आधिकारिक विद्वान थे। उन्होंने मानव व्यवहार और प्रकृति का गहन अध्ययन किया था। उनकी अपार दानशीलता भी उनको विशिष्ट बनाती है। यह विचार आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग में आयोजित विशेष व्याख्यान में प्रो. विजय बहादुर सिंह ने व्यक्त किए। व्याख्यान का विषय था – रहीम की कविता : युगबोध और संघर्ष।

अपने स्वागत वक्तव्य में हिंदी विभाग के प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि रहीम को हमारे विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए , क्योंकि संत साहित्य ही वह साहित्य है जो मध्यकाल में आधुनिक बोध पैदा करता है । जिसकी चेतना का केंद्र मनुष्य है ।रहीम हमारी साझा संस्कृति के प्रतीक हैं ।उनकी रचनाधर्मिता भारतीय संस्कृति की समरसता और वसुधैव कुटुम्बकम के उद्घोष को सार्थकता प्रदान करती है। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.प्रणय कृष्ण ने संस्कृत व ब्रज के सम्मिश्रण में लिखी कविता को उद्धृत कर बताया कि रहीम हमारे समय में आज भी प्रासंगिक हैं। उनके यहां प्रेम के सूत्र से मानव और भाषा दोनों निबद्ध हैं ।

प्रो. लालसा यादव और डॉ. संतोष कुमार सिंह ने पुष्पगुच्छ और शॉल प्रदान कर स्वागत किया। संचानल डॉ. अमृता ने किया। धन्यवाद डॉ. बिजय कुमार रविदास ने दिया। इस अवसर पर प्रो.योगेंद प्रताप सिंह, प्रो.शिवप्रसाद शुक्ल, डॉ .सूर्यनारायण सिंह, डॉ. आशुतोष पारथेश्वर, डॉ. कुमार बीरेंद्र, डॉ. बसंत त्रिपाठी, डॉ. ब्रजेश पांडेय,डॉ. रतन कुमारी वर्मा, डॉ दिनेश कुमार, डॉ. गाजुला राजू, डॉ. मीना कुमारी,डॉ. दीनानाथ मौर्य,डॉ.वीरेंद्र मीणा,डॉ. जनार्दन,डॉ. राजेश गर्ग, डॉ. शिव कुमार यादव, डॉ. अमितेश कुमार,डॉ. प्रेमशंकर,बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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