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वाराणसीः नेशनल हेल्थ मिशन तथा ममता हेल्थ इंस्टीटयूट फॉर मदर एंड चाइल्ड के संयुक्त सहयोग से स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एडोलसेंट हेल्थ एंड डेवलपमेंट (साथिया केंद्र) कमरा न. 104 , सर सुन्दरलाल चिकित्सालय, बी.एच.यू. वाराणसी में “विश्व हीमोफिलिया दिवस (World Haemophilia Day, 2024)” की पूर्व संध्या में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन सेंटर की नोडल अधिकारी प्रोफेसर डॉ. संगीता राय तथा चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक के निर्देशन में किया गया| इस वर्ष विश्व क्षयरोग दिवस का थीम “Equitable access for all: recognizing all bleeding disorders” था|

कार्यक्रम की शुरुआत साथिया केंद्र तथा जनरल मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. ललित प्रकाश मीना ने किशोरों को जागरूक करते हुए की। उन्होंने बताया कि हीमोफीलिया आमतौर पर वंशानुगत रक्तस्राव विकार है, जिसमें रक्त ठीक से नहीं जमता है। इससे सहज रक्तस्राव के साथ-साथ चोट या सर्जरी के बाद रक्तस्राव भी हो सकता है। रक्त में कई प्रोटीन होते हैं जिन्हें क्लॉटिंग कारक कहा जाता है जो रक्तस्राव को रोकने में मदद कर सकते हैं। हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों में फैक्टर VIII (8) या फैक्टर IX (9) का स्तर कम होता है। किसी व्यक्ति में हीमोफीलिया की गंभीरता रक्त में कारक की मात्रा से निर्धारित होती है। कारक की मात्रा जितनी कम होगी, रक्तस्राव होने की संभावना उतनी ही अधिक होगी जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

साथिया केंद्र तथा स्त्री व प्रसूति तंत्र डॉ. ममता ने किशोर-किशोरियों को बताया हीमोफीलिया की समस्या का पता लगाने के लिए प्रेगनेंसी से पहले टेस्ट करवाया जाता है। इसे जेनेटिक टेस्ट कहा जाता है। इससे बच्चे पर पड़ने वाली बीमारी के खतरे की जानकारी मिल जाती है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में साथिया केन्द्र के काउंसलर नवीन पाण्डेय, नेहा चौधरी, प्रोग्राम असिस्टेंट श्री मज़ाहिर अब्बास हैदरी, देवेन्द्र यादव तथा प्रशिक्षु रोहित, विपुल, शिवांगी, रश्मि, युगल, नंदिनी, रवि, मनमोहन, शुभम, सौम्या, प्रीती, आदि की भूमिका बहुत ही अहम रही |

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