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वाराणसीः BHU से संबद्ध आर्य महिला पीजी कॉलेज की आचार्य डॉ. नमिता सिंह ने कहा कि गौरैया कीट-पतंगों को नियंत्रित करके पारिस्थितिकी-तंत्र को संतुलित बनाए रखने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। गौरेया फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों को चट कर जाती है। गौरेया मनुष्यों के लिए भोजन के स्रोत की रक्षा करने में अहम भूमिका निभाती है, अतः हम सभी को गौरैया के संरक्षण के लिए संकल्प लेने की आवश्यकता है।
वह संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित “विश्व गौरैया दिवस” के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपनी बात रख रही थीं। इस मौके पर कॉलेज की प्राचार्या रचना दुबे की देखरेख में ‘पोस्टर मेकिंग एवं स्लोगन लेखन’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस मौके पर छात्राओं ने पोस्टर तथा स्लोगन के माध्यम से प्रकृति में गौरैया का महत्व, गौरैया-संरक्षण के विभिन्न उपाय तथा विलुप्ति के कारण जैसे विषयों को चित्रित किया।

प्रतियोगिता में लगभग 20 छात्राओं ने प्रतिभाग किया, जिसमें प्रथम पुरस्कार गीतांजलि वर्मा, द्वितीय पुरस्कार सानु प्रिया, तृतीय पुरस्कार नम्रता यादव तथा सांत्वना पुरस्कार आकांक्षा मिश्रा को मिला।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिव्या ने, मंगलाचरण डॉ. पुष्पा त्रिपाठी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नागमणि त्रिपाठी ने किया। डॉ. अरिमा त्रिपाठी, डॉ. रितु कयाल, श्री विवेक तिवारी इत्यादि ने आयोजन में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

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