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अलीगढ़ 10 जुलाईः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) के सर्जनों की एक टीम ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत मणिपुर के इम्फाल स्थित क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (आरआईएमएस) में दो बच्चों की कार्डियक सर्जरी अंजाम दी, जिनके हृदय में छेद था।

उक्त टीम में प्रोफेसर मोहम्मद आजम हसीन (अध्यक्ष, कार्डिओथोरकिक सर्जरी विभाग), डॉ नदीम राजा (एनेस्थीसिया विभाग) और डॉ साबिर अली खान (चीफ परफ्यूसनिस्ट) शामिल थे, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत हृदय संबंधी सेवाएं शुरू करने के लिए डॉक्टरों को सलाह देने के लिए रिम्स, इम्फाल के दौरे पर थी।

प्रोफेसर आजम हसीन ने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों में पहली बार किसी सरकारी केंद्र में हृदय संबंधी सर्जरी की गई है। डॉ. नदीम रजा ने कहा कि नए केंद्र में एनेस्थीसिया देना चुनौतीपूर्ण काम था, क्योंकि दोनों बच्चे गंभीर रूप से बीमार थे। डॉ. साबिर अली खान ने बताया कि दोनों बच्चों की हृदय सर्जरी को सफलतापूर्वक अंाजम देकर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और माता-पिता उनकी प्रगति से खुश हैं।

डाक्टर शाद अबकरी (बाल रोग विभाग और नोडल अधिकारी, अंतःविषयी बाल चिकित्सा हृदय केंद्र – आईपीसीसी, जेएनएमसी) ने बताया कि जेएनएमसी पिछले 6 वर्षों से रिम्स, इम्फाल का मार्गदर्शन कर रहा है और हमने उन्हें हृदय केंद्र स्थापित करने में मदद की है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोगों को जेएनएमसी द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के लिए आईपीसीसी को उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) के स्तर तक बढ़ा दिया गया है।

आरबीएसके के पूर्व संयोजक और सलाहकार प्रो. तबस्सुम शहाब ने बताया कि आईपीसीसी की स्थापना 2018 में एनएचएम द्वारा की गई थी और तब से इसने 15 हजार से अधिक बच्चों की जांच की है और जेएनएमसी की टीम द्वारा लगभग 14 सौ हृदय शल्य चिकित्सा की गई है। उन्होंने कहा कि यह जेएनएमसी के लिए गर्व का क्षण है कि न केवल यूपी से बल्कि पूरे उत्तर भारत से हृदय संबंधी बीमारियों के लिए मरीज जेएन मेडिकल कालिज आ रहे हैं। आरबीएसके के संयोजक प्रो. कामरान अफजल ने कहा कि जेएनएमसी में हृदय रोग विभाग की टीम अच्छा काम कर रही है और हर दिन केंद्र में प्रतीक्षा सूची बढ़ रही है, जो जेएनएमसी में लोगों के विश्वास का प्रमाण है।

मेडिसिन संकाय की डीन और जेएनएमसी की प्रिंसिपल और सीएमएस, प्रोफेसर वीणा महेश्वरी और चिकित्सा अधीक्षक, जेएनएमसी प्रोफेसर वसीम रिजवी ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए टीम के सदस्यों को बधाई दी है।

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