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वाराणसीः बरकछा, मिर्जापुर में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना द्वारा वित्त पोषित और सहयोग प्राप्त परियोजना  “कुक्कुट पालन: विंध्यान क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक कमजोर वर्ग की स्थायी आजीविका के लिए बैकयार्ड पोल्ट्री फार्म” के अन्तर्गत सातवीं तीन दिवसीय बैकयार्ड पोल्ट्री प्रशिक्षण कार्यशाला के सफल आयोजन का समापन किया गया।
इस कार्यशाला के अन्तर्गत विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक कमजोर वर्ग की संधारणीय आजीविका के लिए बैकयार्ड पोल्ट्री फार्म को एक विकल्प के रूप में चुनने के लिए सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को चुनना, उन्हें प्रशिक्षित करना और शुरुवात की सहायता के लिए आवश्यक मूलभूत घटकों की प्राथमिक उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाना शामिल था।
आज समापन समारोह में मुख्य अतिथि पशु पोषण विभाग के सहायक आचार्य डॉ महिपाल चौबे रहे जिन्होंने किसानों के बीच कुक्कुट पालन के साथ साथ पशुपालन के विभिन्न्न आयामों के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने किसानों को कुक्कुट पालन हेतु प्रोत्साहित किया। समारोह में कार्यशाला सचिव डॉ. उत्कर्ष कुमार त्रिपाठी ने मुर्गी पालन के फायदों और परिवार के आर्थिक संतुलन में कुक्कुट पालन के स्वरूप को समझाया। कार्यशाला सह सचिव डॉ. अनुराधा कुमारी ने परियोजना में महिलाओं हेतु  सहभागिता के महत्व से सभी को अवगत कराया और महिलाओं को इसे व्यवसाय के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
इस बार पिछली कार्यशालाओं की सफलता की ही तरह इस बार भी कुल 42 से अधिक लाभार्थियों ने प्रतिभागिता हेतु पंजीकरण किया था जिसके लिए प्राथमिकता स्वरूप जागरूक महिलाओं एवं बेरोजगार युवाओं का चयन किया गया । इस सातवीं तीन दिवसीय कार्यशाला के लिए दांती, लाल गंज, मनिहान, बहुती, कोटवा पाण्डेय, राजगढ़, बिरमापुर, बेलहरा आदि ग्रामीण क्षेत्रों से चयन किया गया। कार्यशाला का आयोजन 18-20 अप्रैल , 2024 तक के लिए किया गया। जिसके समापन के समय प्रतिभागियों को चूजा, दाना, दवा आदि एवं प्रमाणपत्र वितरण के साथ साथ परियोजना के अंतर्गत प्रकाशित “बैकयार्ड कुक्कुट पालन” शीर्षक से बहुपयोगी पुस्तक का भी वितरण किया गया।
इस  कार्यक्रम में डॉ पवन कुमार यादव, डॉ अभिषेक सिंह, डॉ संदीप चौधरी, डॉ रजत वशनेय, डॉ अंशुमान कुमार, डॉ अजीत सिंह, डॉ अजय चतुर्वेदानी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के खिले चेहरे और बेहतर भविष्य की शुभकामना के साथ हुआ।
बैक्यार्ड कुक्कुट उत्पादन के बारे में बताते हुए कार्यशाला सचिव डॉ उत्कर्ष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि बैक्यार्ड कुक्कुट उत्पादन में किसानों को लागत के रूप में बहुत कम खर्च वहन करना पड़ता है और इसके बदले में उसको उसके लागत से कई गुना ज्यादा और समुचित लाभ मिलता है।
बैक्यार्ड कुक्कुट उत्पादन के द्वारा किसानों को एक सतत लाभ और अतिरिक्त आय के श्रोत के रूप में सृजन होने की भरपूर संभावना है। अपने घर के आस पास ही बैक्यार्ड कुक्कुट उत्पादन के द्वारा हम गरीब किसानों के परिवारों में कुपोषण से लड़ने के लिए और पोषण संबंधी अन्य समस्याओं से दो-चार हो रहे परिवारों की पोषण सुरक्षा हेतु भी कुक्कुट पालन से प्राप्त अंडे और मांस का उपयोग कर सकते हैं। इस तरह बैक्यार्ड कुक्कुट पालन को अपनाते हुए किसान अपने घर में ही एक लघु व्यवसाय के रूप में इसको अपना सकता है, और कुछ ही दिनों में एक प्रभावी आय और आजीविका के रूप में इसको पहचान दिला सकता है।

बैक्यार्ड कुक्कुट उत्पादन के लिए परिवार के पुरुषों की सहभागिता की बहुत ज्यादा आवश्यकता नहीं होती है बल्कि इसके बदले में घर की महिलाएं और बच्चे भी छोटे छोटे सामूहिक प्रयास से अपने घर में ही कुक्कुट उत्पादन कर सकते हैं और इसको परिवार के एक अतिरिक्त आय के साथ साथ पोषण सुरक्षा श्रोत के रूप मे भी इसे अपने आस पास के परिवेश मे इसको प्रचारित करके एक नई पहचान दिल सकते हैं।

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