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लखनऊः लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग ने मिशन शक्ति के तहत एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया, कार्यक्रम का उद्घाटन वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर गौरी सक्सेना ने किया। इसके बाद मिशन शक्ति की संयोजक प्रोफेसर मधुरिमा लाल ने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कार्यक्रम की थीम महिला सशक्तिकरण प्रस्तुत की। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य, आत्म-निर्भरता, सुरक्षा और महिला साक्षरता बढ़ाने के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया।

इसके बाद विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मुन्ना सिंह ने सम्माननीय वक्ता, दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर राकेश चंद्रा का परिचय कराया। “मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण” पर अपने व्याख्यान में प्रोफेसर चंद्रा ने चर्चा की कि शिक्षा और स्वास्थ्य लाभ के माध्यम से महिलाओं की स्थिति में कैसे सुधार किया जा सकता है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को निर्णय लेने का अधिकार देकर उनकी स्थिति को बदला जा सकता है। उन्होंने स्वतंत्र भारत से लेकर आधुनिक भारत तक भारतीय समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण के जिम्मेदार कारकों की खोज की। सामाजिक संरचना, प्राकृतिक और भौतिक पहलुओं के महत्व को स्वीकार किया गया और समाज में लैंगिक पूर्वाग्रह को खत्म करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया।
व्याख्यान के बाद प्रोफेसर आर चंद्रा को शॉल, विभागीय मग और स्मृति चिन्ह के रूप में सुंदर पौधा देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में विभाग के प्रमुख प्रोफेसर मुन्ना सिंह सहित शिक्षक, पीएचडी छात्र, साथ ही विभाग के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र और कर्मचारी उपस्थित थे, जिन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। इसके साथ ही लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग ने “महिला सशक्तिकरण” विषय पर आधारित भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया, जिसमें विभाग के पीएचडी छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विजेता आकांक्षा दुबे रहीं।
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आज के समय में विशेषकर भारतीय सामाजिक, आर्थिक, और राजनितिक संदर्भो को धायण में रखते हुए, एक समाजशात्रिय परिदृष्टि से आधुनकिता का अर्थ पश्चिमीकरण समतुलय तक ही सीमित नहीं है, मनुष्यों मनुष्यो का आपसी सम्बन्ध है! चाहे वह पूंजी, सामंतवाद, परिवार हो या धर्म इस सब का व्‍यक्ति से हैं ना की वस्तुओ से। वस्तु, तकनीक, जीवन शैली, ज्ञान, विज्ञान ये सब आधुनिकता के बाहरी परिक्षेत्र की परिचर्चा है न कि आतंरिक।

देश के जाने माने समाजशात्री प्रो. दीपांकर गुप्ता ने आज, डॉ. राम मनोहर लोहिया पीठ, सामजशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के तत्वाद्वान में आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान के माधयम से आधुनिकता के निर्धारण में महत्तवपूर्ण कारको पर प्रकाश डाला। उन्होंने लोकतंत्र, नागरिकता, नैतिकता और नीतिशास्त्र पर आधुनिकता के सन्दर्भ में अपने विचार रखे। प्रो. गुप्ता ने नीतिशास्त्र अन्य लोगो का ध्यान देता है, अबकी नैतिकता मात्र व्यक्ति विशेष पर केन्द्रित होता है। सही अर्थो में आधुनिकता का समावेशन और अंतर्विषयकता है जो सभी लोगो को समान बनाती है। आगे उन्होंने बताया की, लोकतंत्र सभी लोगो के लिए अवसर प्रदान करता है तथा स्तिथि की समानता प्रदान करता है। ऐतिहासिक परिदृष्टि प्रो. गुप्ता ने लोकतंत्र के बाजय नागरिकता पर विशेष ध्यान दिलाया, जो केवल मतदान प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं है। वर्तमान समय में कपडे, गाडी, जेवरात ये सब शैली के तत्त्व हैं ना की फैशन के. फैशन वह है जो बड़े पैमाने पर उत्पादित होता है और सभी वर्गों के लिए सुलभ उपलब्ध होता है। आधुनिकता एक सतत प्रक्रिया है जो सभी समाज में स्थान और समय के अनुरूप व्यापत होती है और यह तुलनात्मक नहीं होती है।

इस अवसर पर समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. डी. आर. साहू और अन्य शिक्षकगण और विभाग के शोधार्थी उपस्थित रहे।

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