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वाराणसीः काशी हिंदू विश्वविद्यालय से संबद्ध आर्य महिला पी.जी. कॉलेज के संस्कृत विभाग द्वारा प्राचार्या रचना दूबे के निर्देशन में महाविद्यालय में “विश्व जल दिवस” के उपलक्ष्य में श्लोक-गायन, कविता-पाठ, भाषण, स्लोगन लेखन एवं चित्र-निर्माण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की स्नातक एवं स्नातकोत्तर की छात्राओं ने प्रकृति में जल का महत्त्व, जल-संचयन एवं संरक्षण तथा उसके विभिन्न उपायों से सम्बद्ध चित्रण, स्लोगन लेखन, श्लोक-पाठ, कविता-पाठ एवं भाषण के माध्यम से अपनी भावों को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. दिव्या ने कहा कि पञ्च तत्त्वों में जल की महती उपयोगिता है तथा यह समस्त पार्थिव जगत की उत्पत्ति का मुख्य कारण है। उद्बोधन क्रम में डॉ० नागमणि त्रिपाठी ने कहा कि पृथ्वी का 70% भूभाग जल से व्याप्त होने पर भी विश्व में 3% तथा भारत में 10% जल पीने योग्य हैं, इसी कारण जल संचयन एवं संरक्षण की आवश्यकता है। मंगलाचरण तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पुष्पा त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में डॉ. अरिमा त्रिपाठी, डॉ. रितु कयाल, श्री विवेक तिवारी के साथ महाविद्यालय की स्नातक एवं स्नातकोत्तर की छात्राएं उपस्थित रहीं।

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